Nature Poems Hindi

वन, नदियां, पर्वत व सागर,अंग और गरिमा धरती की,इनको हो नुकसान तो समझो,क्षति हो रही है धरती की।

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हमसे पहले जीव जंतु सब,आए पेड़ ही धरती पर,सुंदरता संग हवा साथ में,लाए पेड़ ही धरती पर।

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पेड़ -प्रजाति, वन-वनस्पति,अभयारण्य धरती पर,यह धरती के आभूषण है,रहे हमेशा धरती पर।

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कलयुग में अपराध काबढ़ा अब इतना प्रकोपआज फिर से काँप उठीदेखो धरती माता की कोख !!

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समय समय पर प्रकृतिदेती रही कोई न कोई चोटलालच में इतना अँधा हुआमानव को नही रहा कोई खौफ !!

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मधुरिमा के, मधु के अवतारसुधा से, सुषमा से, छविमान,आंसुओं में सहमे अभिरामतारकों से हे मूक अजान!सीख कर मुस्काने की बानकहां आऎ हो कोमल प्राण!

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